South Africa मैच के बाद Selectors Tilak Varma को लेकर अचानक इतने excited क्यों हो गए?
भारत–दक्षिण अफ्रीका के दूसरे T20 मैच में तिलक वर्मा ने 32 गेंदों में 62 रनों की तूफानी पारी खेलकर सबका ध्यान खींच लिया। मैच भारत हार गया, लेकिन तिलक की यह इनिंग सिलेक्टर्स के लिए एक बड़ा संकेत बन गई।
मैच खत्म होते ही सोशल मीडिया और क्रिकेट पैनल में एक ही चर्चा थी—
“क्या तिलक अब भारतीय टीम के मिडिल-ऑर्डर का भविष्य बन सकते हैं?”
सवाल यही नहीं है कि selectors excited क्यों हुए…
बल्कि सवाल यह है कि इतनी जल्दी क्यों हुए?
उसका जवाब तिलक की इस पारी, उनके कौशल, और उनकी मानसिक मजबूती में छुपा है।
1. हार की स्थिति में भी तिलक वर्मा का ‘फाइटर मोड’ देखने लायक था
भारत का टॉप ऑर्डर पूरी तरह टूट चुका था। 70 रन के भीतर चार बड़े विकेट गिर गए थे।
ऐसे समय में ज्यादातर युवा खिलाड़ी दबाव में आ जाते हैं, लेकिन तिलक ने उल्टा गियर डाला:
- पहली ही गेंद से स्ट्राइक रोटेशन
- पेस + स्पिन दोनों पर बराबर कंट्रोल
- मैच का रिदम अपनी तरफ खींचना
- 180+ स्ट्राइक रेट से रन बनाना
दूसरी तरफ विकेट गिर रहे थे, लेकिन तिलक के चेहरे पर एक भी घबराहट नजर नहीं आई।
यह वही चीज है जो सिलेक्टर्स ढूंढते हैं—
“दबाव में न टूटने वाले खिलाड़ी”।
भारत को लंबे समय से मिडिल ऑर्डर में ऐसा बल्लेबाज चाहिए था जो मैच बिगड़ने पर टिककर खेल सके।
तिलक ने साबित कर दिया कि वह उस पोजिशन का प्राइम कैंडिडेट हैं।
2. चयनकर्ताओं को तिलक की बैटिंग रेंज ने चौंकाया
इस मैच में तिलक ने तीन चीजें दिखाईं जो चयन समिति को बेहद पसंद आईं:
✔ (A) Risk + Control का संतुलन
चाहें पावर हिटिंग हो या टाइमिंग— तिलक ने दोनों को संतुलित किया।
✔ (B) मैदान के चारों ओर शॉट्स
उनका 360° गेम अब साफ दिखने लगा है:
- Cover drive
- Inside-out loft
- Pull shot
- Flat sweep
- Straight hits
यह T20 के लिए gold skill माना जाता है।
✔ (C) South Africa के गेंदबाजों के खिलाफ आत्मविश्वास
बार्टमैन और एंगिडी जैसे गेंदबाजों पर उन्होंने बिना झिझक के बड़े शॉट लगाए।
Selectors के लिए यह बहुत बड़ी बात है कि खिलाड़ी गुणवत्ता वाले अटैक पर रन बना रहा है।

3. तिलक पहले भी चमके हैं—यह इनिंग उनका “Consistency Proof” थी
सिलेक्टर्स सिर्फ एक पारी पर नहीं झूमते।
लेकिन जब खिलाड़ी बार-बार प्रदर्शन करे, तब वह ध्यान खींचता है।
तिलक के पिछले प्रदर्शन:
- साउथ अफ्रीका के खिलाफ लगातार बड़े स्कोर
- T20I में सबसे ज्यादा छक्कों का रिकॉर्ड
- वांडरर्स में दो शतक
- एशिया कप फाइनल में 69 रन और Player of the Match
- IPL में लगातार मैच बदलने वाली इनिंग्स
यह 62(32) की इनिंग इन सब रिकॉर्ड्स का सबूत थी—
कि तिलक का फॉर्म स्थायी है, सिर्फ चमक नहीं।

4. Team India को Middle Order में नए स्टार की जरूरत
कप्तान बदल रहे हैं, प्लेइंग XI में नए खिलाड़ी आ रहे हैं,
और भारत को ऐसे बल्लेबाज की जरूरत है जो:
- नंबर 4–5 पर काउंटर अटैक कर सके
- स्पिन + पेस दोनों को खेल सके
- मैच फिनिश कर सके
- दबाव झेल सके
तिलक इन चारों कसौटियों पर खरे उतरते हैं।
गौतम गंभीर की कोचिंग में टीम का प्लान साफ है—
“लॉन्ग-टर्म स्क्वाड बनाओ, रीबिल्ड करो, और 2026 वर्ल्ड कप को लक्ष्य रखो।”
इसमें तिलक जैसा खिलाड़ी बहुत फिट बैठता है।

5. फील्डिंग और गेम-अवेयरनेस ने भी सिलेक्टर्स को प्रभावित किया
दूसरे T20 में तिलक ने:
- डेवाल्ड ब्रेविस का बेहतरीन लो कैच पकड़ा
- पॉजिशनिंग बार-बार बदली
- बाउंड्री पर सटीक judgement दिखाया
- रनिंग बिटवीन द विकेट्स में एथलेटिक मूवमेंट दिखाया
Selectors की नजर हमेशा ऐसी छोटी चीजों पर होती है।
आजकल सिर्फ “अच्छा बल्लेबाज” होना काफी नहीं—
टीम को 3D प्लेयर चाहिए।
तिलक इस फॉर्मेट में फिट बैठते हैं।
6. तिलक का बैकग्राउंड—सिलेक्टर्स को ऐसे खिलाड़ी पसंद आते हैं
तिलक वर्मा का सफर संघर्ष से भरा है:
- पिता बिजली मिस्त्री
- आर्थिक दिक्कतें
- शुरुआती दिनों में कोचिंग फीस का भी संघर्ष
- रैब्डोमायोलिसिस जैसी गंभीर बीमारी से लड़कर वापसी
- हर बार खुद को प्रूव किया
ऐसे खिलाड़ी बहुत भूखे होते हैं—
उन्हें पता होता है कि मौका कैसे पकड़ना है।
सिलेक्टर्स का विश्वास ऐसे खिलाड़ियों पर जल्दी जमता है।

7. टीम की हार में भी अकेले लड़ने वाले खिलाड़ी की असली कीमत होती है
क्रिकेट में एक कहावत है—
“टीम हार जाए, पर जिसने दिल जीता—वह अगला स्टार बनता है।”
तिलक की 62(32) की इनिंग में यही स्टारडम दिखाई दिया।
इतिहास गवाह है कि भारत के कई बड़े स्टार—
विराट, युवराज, रोहित—
सबकी पहचान पहले ऐसी हार वाली, लेकिन यादगार पारियों से ही बनी।
निष्कर्ष: सिलेक्टर्स excited क्यों हुए?
क्योंकि तिलक वर्मा ने South Africa मैच में यह दिखा दिया:
- वह दबाव में परिपक्व खेलते हैं
- खेल को पढ़ना जानते हैं
- शॉट रेंज पूरी है
- फील्डिंग शानदार है
- लगातार प्रदर्शन कर रहे
- और टीम इंडिया के भविष्य के हिसाब से फिट हैं
इसलिए चयनकर्ताओं में उत्साह आना स्वाभाविक है।
तिलक सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं—
भारत के नए मिडिल-ऑर्डर पिलर बनने की ओर बढ़ रहे हैं।
और यह बात selectors अच्छे से समझ चुके हैं।