दबाव में क्यों गायब हो जाती है सूर्यकुमार यादव की ‘निडर’ बल्लेबाजी? विशेष रिपोर्ट
मुल्लांपुर, 12 दिसंबर 2025
दक्षिण अफ्रीका ने 213/6 का पहाड़ खड़ा किया। भारत की पारी 11.5 ओवर में 104/6 पर पहुँच चुकी थी। तभी क्रीज पर आए कप्तान सूर्यकुमार यादव। स्टेडियम में एक ही आवाज गूँज रही थी – “स्काई… स्काई… स्काई…”। सबको लगा था कि अब शुरू होगा वो जादू। वो 360 डिग्री वाला तूफान।
लेकिन अगले 25 गेंदों में जो हुआ, उसने पूरे क्रिकेट जगत को सोचने पर मजबूर कर दिया।
सूर्या ने 28 रन बनाए। स्ट्राइक रेट 112। आखिरी 8 गेंदों में सिर्फ 4 रन। दो बार मिड-ऑन, एक बार मिड-ऑफ के हाथों आसान कैच। भारत 51 रनों से हारा। सीरीज 1-1 से बराबर।
Also Read:- तिलक वर्मा की 62(34) की पारी के पीछे छुपी भावुक कहानी—और आखिर टीम साथ क्यों नहीं दे पाई?
और एक बार फिर वही सवाल – दबाव आते ही सूर्यकुमार यादव की निडरता कहाँ गायब हो जाती है?
आंकड़े बयाँ कर रहे हैं कड़वा सच
- जब टीम 0–2 विकेट पर होती है → सूर्या का टी-20 इंटरनेशनल स्ट्राइक रेट: 178.42
- जब टीम 5 या उससे ज्यादा विकेट गँवाती है → स्ट्राइक रेट गिरकर: 128.66
- पिछले 18 महीनों में दबाव की स्थिति में औसत: सिर्फ 19.8
- 2024–25 में 7 बार 150+ के लक्ष्य का पीछा करते हुए 4+ विकेट गिरने पर सूर्या आउट: 6 बार
इन आंकड़ों को देखकर साफ है कि सूर्या जब ‘फ्री हिट’ की तरह खेलते हैं, तब दुनिया के नंबर-1 टी-20 बल्लेबाज लगते हैं। लेकिन जैसे ही मैच ‘डू ऑर डाई’ हो जाता है, वही हाथ काँपने लगते हैं।

विशेषज्ञों का विश्लेषण: समस्या कहाँ है?
पूर्व भारतीय बल्लेबाज आकाश चोपड़ा ने अपने यूट्यूब चैनल पर खुलकर कहा,
“सूर्या का दिमाग बहुत तेज चलता है, लेकिन दबाव में यही तेजी उनकी दुश्मन बन जाती है। वो सोचते हैं – ‘मुझे तो यही खेलना है, यही मेरा स्टाइल है’। लेकिन क्रिकेट में स्टाइल से ज्यादा जरूरी होता है सिचुएशन। रोहित शर्मा दबाव में 2 गियर नीचे कर लेते हैं, सूर्या अभी भी 5वें गियर में ही दौड़ाना चाहते हैं।”
वहीं टीम इंडिया के पूर्व फील्डिंग कोच आर. श्रीधर ने एक स्पोर्ट्स चैनल पर बताया,
“सूर्या ओवरथिंक करते हैं। वो सोचते हैं कि अगर मैंने अब रैंप शॉट नहीं मारा तो लोग कहेंगे कि मैं डर गया। यही डर उन्हें गलत शॉट खेलने पर मजबूर कर देता है। निडरता का मतलब जिद नहीं होता। निडरता का मतलब सही समय पर सही शॉट चुनना होता है।”
सूर्या ने खुद माना – “मैंने गलत शॉट खेले”
मैच के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूर्यकुमार ने पहली बार खुलकर स्वीकार किया,
“हाँ, मैंने गलत शॉट खेले। मैं कोशिश कर रहा था कि जल्दी रन बनाऊँ, लेकिन प्लानिंग सही नहीं थी। दबाव में मुझे अपनी बल्लेबाजी को मैच की जरूरत के हिसाब से ढालना होगा। मैं इस पर काम कर रहा हूँ। अगले तीन मैचों में आप एक अलग सूर्यकुमार यादव देखेंगे।”

क्या है असली वजह? मनोवैज्ञानिक नजरिया
स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट डॉ. रुचिता मल्होत्रा बताती हैं,
“सूर्यकुमार की पहचान ही ‘360 डिग्री बल्लेबाज’ की है। दबाव में उनका सबकॉन्शियस माइंड कहता है – ‘अगर मैंने नॉर्मल शॉट खेले तो लोग कहेंगे कि मैं डर गया’।
ये पहचान का संकट (Identity Crisis) है। विराट कोहली और रोहित शर्मा ने सालों में ये सीख लिया कि कप्तान बनने के बाद अपनी पहचान से ऊपर उठकर टीम की जरूरत को प्राथमिकता देनी होती है। सूर्या अभी उस प्रोसेस में हैं।”
धर्मशाला में अगला इम्तिहान
14 दिसंबर को धर्मशाला में तीसरा टी-20।
- ठंड
- ऊँचा मैदान
- बड़ा ग्राउंड
यहाँ बड़े शॉट खेलना और भी मुश्किल होगा। दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज स्विंग और बाउंस जरूर लेंगे।
अगर भारत फिर जल्दी विकेट गँवाता है, तो सूर्या के सामने सबसे बड़ा टेस्ट होगा।
- क्या वो इस बार गियर बदलेंगे?
- क्या वो 15–20 गेंदें सिंगल-डबल लेकर स्थिति संभालेंगे और फिर आखिरी 5 ओवर में तूफान लाएँगे?
- या फिर एक बार फिर ‘स्काई’ बादलों में खो जाएगा?

फैंस का सवाल, सूर्या का जवाब
सोशल मीडिया पर फैंस का गुस्सा साफ दिख रहा है:
“फ्री में 200 स्ट्राइक रेट, दबाव में 100 भी नहीं – ये कैसी निडरता है?”
“कप्तानी का बोझ साफ दिख रहा है।”
लेकिन सूर्या ने वादा किया है –
“अगला मैच मेरा जवाब होगा।”
क्रिकेट प्रेमियों की निगाहें अब धर्मशाला पर टिकी हैं।
क्या सूर्यकुमार यादव दबाव में भी ‘स्काई’ बने रहेंगे
या फिर एक बार फिर सवालों के घेरे में आएँगे?
14 दिसंबर को पता चलेगा।
#SuryaKumarYadav #INDvSA #T20Series #CricketNews #HindiCricket